मंगल वाणी

जानें क्यों और कैसे ?

आध्यात्मिक ज्ञान : सब कुछ मिलने पर भी क्यों है अधूरापन?

मन की प्रकृति है संग्रह करना मन की प्रकृति हमेशा ही संग्रह करने की होती है। जब यह स्थूलरूप...

तिब्बत के गुरु मिलारेपा : तंत्र से ज्ञान तक का सफर

अतीत में एक समय ऐसा भी था, जब तिब्बत देश पूरी तरह अध्यात्म और मानवीय चेतना को समर्पित था। तिब्बत की जमीन...

जानें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना का रहस्य

अगर आप रीढ़ की शारीरिक बनावट के बारे में जानते हैं, तो आप जानते होंगे कि रीढ़ के दोनों ओर दो छिद्र...

जब गोरखनाथ ने अपने गुरु को बचाने का प्रयास किया

आज भी गोरखनाथ भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध योगियों में माने जाते हैं। उनके अनुयायियों को ‘कनफट’ के नाम से जाना जाता है,...

समाधि की अवस्था कैसी होती है?

समाधि की लालसा से बच नहीं सकते अस्तित्व दो चीजों से मिलकर बना है – ‘वह जो है’ और...

कैसे करें मृत्यु की तैयारी? शरीर के चक्रों का गणित और विज्ञान

दुनिया में हर जगह लोग शांतिपूर्वक मरने की बात करते हैं। दरअसल उनका मतलब यह होता है कि वे तकलीफ झेलकर और...

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    ध्यान करने में शरीर की मदद लेने के सरल तरीके

    आध्यात्मिक होने का मतलब हमेशा विनम्र और सुशील होना समझा जाता है। दुर्भाग्य से सुशील होने का मतलब कोमल या कमजोर...

    शून्य ध्यान – अपने भीतर के शून्य का अनुभव

    शून्य का क्या महत्व है? शून्य को अंग्रेज़ी में ‘एमप्टिनेस’ (खालीपन) कह सकते हैं। हालाँकि अंग्रेज़ी का शब्द ‘एमप्टिनेस’ शून्य के...

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